NEET Biology परीक्षा में जीवविज्ञान के अंतर्गत हरित क्रांति, जैव प्रौद्योगिकी, कार्बनिक कृषि, इंसुलिन तथा आनुवंशिक अभियांत्रिकी से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए विद्यार्थियों के लिए इन महत्वपूर्ण तथ्यों की सही जानकारी होना बेहद आवश्यक है। नीचे दिए गए तथ्यों को संशोधित और सही रूप में प्रस्तुत किया गया है।
सबसे पहले हरित क्रांति की बात करें तो इसके जनक Norman Borlaug माने जाते हैं। उन्होंने उच्च उत्पादकता वाली गेहूं की किस्मों का विकास करके विश्व में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत में हरित क्रांति का नेतृत्व M. S. Swaminathan ने किया था, इसलिए उन्हें भारतीय हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। उनके प्रयासों से भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना।
NEET Biology Important
जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में Ananda Mohan Chakrabarty का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने TOL प्लाज्मिड पर कार्य किया तथा आनुवंशिक अभियांत्रिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि उन्हें “नीली जैव प्रौद्योगिकी का जनक” नहीं कहा जाता। नीली जैव प्रौद्योगिकी का संबंध समुद्री जीवों और समुद्री संसाधनों पर आधारित तकनीकों से होता है।
कार्बनिक कृषि (Organic Farming) वर्तमान समय में अत्यधिक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यह खेती रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना प्राकृतिक तरीकों से की जाती है। Bhutan ऐसा देश है जिसने पूर्णतः जैविक खेती अपनाने का लक्ष्य रखा है और विश्वभर में इस दिशा में विशेष पहचान बनाई है। “सबसे पहले कार्बनिक कृषि हरियाणा में की गई” यह कथन सही नहीं माना जाता।
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चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी में इंसुलिन का विकास एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। सबसे पहले व्यावसायिक स्तर पर इंसुलिन का निर्माण Eli Lilly and Company ने किया था। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में मानव इंसुलिन का उत्पादन रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक द्वारा किया जाता है। शरीर में पहले प्राक-इंसुलिन (Proinsulin) बनता है, जो बाद में सक्रिय इंसुलिन में परिवर्तित होता है। यह तथ्य NEET में कई बार पूछा जा चुका है।
इसके अतिरिक्त बैसिलस थूरिंजिनोसिस (Bacillus thuringiensis) एक जीवाणु है जिसका उपयोग जैविक कीटनाशक के रूप में किया जाता है। इसी जीवाणु से प्राप्त Bt toxin का प्रयोग Bt cotton जैसी फसलों में किया जाता है ताकि कीटों से सुरक्षा मिल सके।
अंत में सुनहरे चावल (Golden Rice) की बात करें तो इसमें विटामिन B12 नहीं पाया जाता। वास्तव में इसमें बीटा-कैरोटीन होता है, जो शरीर में जाकर विटामिन A में परिवर्तित हो जाता है। इसे विटामिन A की कमी से होने वाले रोगों को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था।
NEET की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को ऐसे तथ्यों को केवल रटना नहीं चाहिए, बल्कि इनके वैज्ञानिक महत्व और उपयोग को भी समझना चाहिए। यही समझ परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने में मदद करती है। और कुछ भी जानना हो तो हमारी वेबसाइट का विजिट करे|















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