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“राष्ट्रीय दूध दिवस(National Milk Day)2025: संपूर्ण आहार का एकमात्र साधन”

राष्ट्रीय दूध दिवस

राष्ट्रीय दूध दिवस( National Milk Day)2025:  दूध मानव पोषण के लिए संपूर्ण आहार होता है, दूध का सेवन जीव भी लगभग जीवन शैली के अनुसार करते है, परंतु मानव दूध का सेवन जीवन के अंत तक करता है। राष्ट्रीय दूध दिवस 26 नवंबर को भारत में मनाया जाता है। यह दिन दूध प्रेमियों, और दूध उत्पादन वाले फार्मों तथा डेयरी संपादक के सम्मान में मनाया जाता है। दूध का उत्पादन किसान भी करता है, और इसको रोजगार का माध्यम भी बनाया जा सकता है।

भारत में दूध सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि पोषण और परंपरा संस्कृति की पहचान है, जन्म से लेकर बुढ़ापे तक दूध पिया जाता है। दूध हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए, ऊर्जा प्रदान करने लिए, तथा शक्ति और शरीर को पोषण देने के लिय बहुत ज्यादा आवश्यकता कारी और फायदेमंद होता है।

राष्ट्रीय दूध दिवस क्यों मनाया जाता है?

"राष्ट्रीय दूध दिवस

26 जनवरी को मनाए जाने वाला दूध दिवस जिसे दुग्ध दिवस भी कहा जाता है, यह दूध भारत की श्वेत क्रांति के दूरदर्शी डॉ. वर्गीस कुरियन के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। यह दिन मानव पोषण मे दुग्ध की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश केंद्रित करता है, और इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में समाज में दूध प्रेमियों और हर व्यक्ति को जागरूकता बढ़ाता है। जिससे मानव जीवन ऊर्जावान और मानसिक स्वास्थ्य हो।

वर्गीज कुरियन:

वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर को हुआ था ये एक भारतीय डेयरी इंजीनियर और सामाजिक उद्यमी थे। उन्होंने भारत में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया और दूध वृद्धि पर ज़ोर दिया, जिससे भारत में श्वेत क्रांति आ सके और उनका यह प्रयास सफल रहा उनका निधन 9 सितंबर 2012 को हुआ था।

दूध को और कितने नामों से जाना जा सकता है?

दूध को अनेकों नामों से जाना जा सकता है, जैसे – क्षीर, पायस, दुग्ध, धन्य, गोधर्त्त आदि नामों से जाना जा सकता है।

इतिहास:

दूध का इतिहास लगभग 8,000 ईसा पूर्व से शुरू हो जाता है, जब मनुष्य ने जानवरों को पालतू पशु बनाना शुरू किया था, उसमें सबसे पहले कुत्ते को पालतू जानवर बनाया था। धीरे – धीरे दूध देने वाले जानवर को पालतू बनाया और उनके दूध का उपयोग करना शुरू कर दिया, और उसको आहार का माध्यम बना डाला|

पहले जानवर के मांस सिर्फ खाते थे, परंतु दूध देने वाले जानवरों का दूध पीने लगे और दूध का अनेक पदार्थ बनाने लगे जैसे – दही, पनीर, मक्खन, घी आदि इनके साक्ष्य नवपाषाण काल में मिले थे। भारतीय उपमहाद्वीप में भी लगभग 8,000 वर्ष पहले जेबू मवेशियों को पालतू बनाया गया था, और सिंधु घाटी सभ्यता तक दुग्ध का प्रचलन एक प्रथा बन गई थी

पुरुष महिला का दूध क्यों पीता है?

पुरुष महिला का दूध प्रेम सम्बन्ध में पीता है या कामवाश में पीता है या तो पति को दूध पिलाना प्रेम और सेवा का भाव दर्शाता है। छाछ साधारण और ठंडी मानी जाती है बल्कि दूध गर्म और सुकून देने वाला होता है। छाछ तक करी प्रोसेस से गुजरना पड़ता है इतना समय कहां होता है। दूध की तासीर गर्म होती है तो जहीर है, पत्नी अपने पति को गर्म रखने के लिए स्तनपान करवाती है।

भारत में दूध का उत्पादन:

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है जो वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 25% योगदान देता है , भारत वर्ष 1998 से लगातार इस स्थान पर बना हुआ है और इसके बाद अमेरिका, चीन ,पाकिस्तान और ब्राजील जैसे देश आते हैं। भारत में दूध उत्पादन में उत्तर प्रदेश राज्य सबसे पहले आता है इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश का स्थान आता है उत्तर प्रदेश भारत के दूध उत्पादन का लगभग 16.30 परसेंट भाग है।

राष्ट्रीय दूध दिवस को कैसे मनाएं?

. राष्ट्रीय दूध दिवस को किसानों, दुग्ध उद्योगपतियों तथा दूध देने वाले जानवरों के सम्मान को समाज में उनके प्रति सकारात्मक विचार और जागरूकता लाओ

. इस दिन परिवार वालो के साथ दूध का सेवन करो, या दूध के द्वारा अनेक पदार्थ बनाओ जिसमें खोया, पनीर, मक्खन, दही और मिठाई आदि।

. इस दिन सोशल मीडिया पर हैप्पी नेशनल मिल्क डे लिखकर एक दूसरे को भेजे और ब्रैकेट में दूध ही सम्पूर्ण आहार होता है , इसको लिखकर डाल दो।

निष्कर्ष:
यह दिन राष्ट्रीय दूध दिवस ही नहीं, बल्कि भारतीय मिल्कमैन, दूधवाला का दिन है। उन्होंने भारत के अनेकों नागरिक के लिए प्रेरणा बने, इस दिन को दूध के विकास और दूध उत्पादन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान में मनाया जाता है। दूध भारत की अर्थव्यवस्था का हिस्सा है, और भारत के लाखों नागरिक का रोजगार है।

सारांश:
इस लेख में राष्ट्रीय दूध दिवस का संपूर्ण वर्णन सरल शब्दों में किया गया है जो आपको समझने में मदद करें, और आप भी दूध को अपने आहार का हिस्सा बनाए।

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