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US-Iran ceasefire: पाकिस्तान की मध्यस्थता से टला बड़ा हादसा

US-Iran ceasefire: पाकिस्तान की मध्यस्थता से टला बड़ा हादसा

अमेरिका और ईरान के बीच 30 दिनों से अधिक चले युद्ध को पाकिस्तान की मध्यस्थता से रोका गया। ट्रंप की डेडलाइन से ठीक पहले युद्धविराम लागू हुआ। जानिए पूरा मामला। rabhatimes कर अनुसार !

US-Iran ceasefire

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले एक साल में दो बार बातचीत हुई, लेकिन दोनों ही बार बातचीत के बीच युद्ध शुरू हो गया। हाल ही में 30 दिनों से अधिक चला संघर्ष ईरान के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गया था। इस दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अती खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ जनरलों की अमेरिकी-इसराइली हमलों में मौत हो गई।


ईरानी सरकार और सरकारी मीडिया ने इस संघर्ष को अपनी जीत बताया। उनका कहना है कि उन्होंने युद्ध में अपने लगभग सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और दुश्मन को ऐतिहासिक विफलता का सामना करना पड़ा है।

डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी और डेडलाइन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता तो मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5.30 बजे) के बाद ईरान पर विनाशकारी हमले होंगे। यह डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले युद्धविराम की घोषणा हुई।

पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका

पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका

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पाकिस्तान ने इस संकट में अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों से बातचीत की और उन्हें इस्लामाबाद में वार्ता के लिए बुलाया। पाकिस्तान की पहल के बाद ही युद्धविराम संभव हो पाया।


ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के नेतृत्व के अनुरोध पर उन्होंने ईरान पर हमले को दो सप्ताह के लिए रोकने पर सहमति दी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अवधि में होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही संभव होगी।

ईरान का मांग

ईरान ने युद्धविराम के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव दिया, जिसमें लड़ाई रोकने के साथ-साथ मुआवजे की मांग भी शामिल थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले रोक दिए जाएं तो वे भी लड़ाई रोकने के लिए तैयार हैं।

इसराइल और लेबनान का मामला

इसराइल ने ट्रंप के फैसले का समर्थन किया, लेकिन साफ किया कि यह सीज़फ़ायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि सीज़फ़ायर की शर्तों में लेबनान पर भी हमले रोकना शामिल है।

निष्कर्ष

ईरान ने इस युद्धविराम को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है, लेकिन ज़मीनी हालात में वह अभी भी कमजोर स्थिति में है। अमेरिका और ईरान दोनों ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। यह युद्धविराम ट्रंप की तय डेडलाइन से सिर्फ कुछ मिनट पहले लागू हुआ, जिससे एक बड़े हादसे को फिलहाल टाल दिया गया।

 

 

 

 

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