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Ram Navami 2026: इस बार दो दिन क्यों मनाए जाएंगी रामनवमी?

Ram Navami

हर साल राम नवमी आती है तो भक्तों में आराध्य राम के जन्मोत्सव का उत्साह छा जाता है। लेकिन 2026 में यह पर्व खास हो गया है। लोग पूछ रहे है – “इस बार रामनवमी (Ram Navami) 2026 दो दिन क्यों? 26 मार्च या 27 मार्च ? अयोध्या में कब सेलिब्रेट किया जायेगा रामनवमी? घर पर कैसे पूजा करे?”” ये सवाल इसलिए उठ रहे है क्योंकि हिंदू पंचांग तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त पर आधारित होता है। कभी कभी एक तिथि दो ग्रिगेरियन दिनों में फैल जाती है। इसी वजह से कन्फ्यूजन होता है।

राम नवमी सिर्फ जन्मोत्सव नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और सत्य का उत्सव है जिसे हम श्री राम चंद्र के जन्म दिन पर मनाते है जब वे प्रकटे तो सभी देव, गंधर्व, आदि पृथ्वी पर वे भी मनुष्य, जंतु, बंदर, भालू आदि का रूप लेकर उतरे और श्री राम के साथ मिलकर राक्षसों का अंत किया और धरती को राक्षसों से मुक्त कराया।

इस लेख में हम सरल शब्दों में हर सवाल का जवाब देंगे , और तिथि का पूरा ब्योरा बताएंगे साथ ही दो दिन मनाए जाने का कारण, सही मुहूर्त, पूजा विधि , महत्व और भक्तों के हर सवाल का जवाब देने का प्रयास करेंगें।

राम नवमी क्या है? पौराणिक कहानी (What is Ram Navami)

Ram Navami

pixabay

राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार इसी दिन त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर भगवान नारायण के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म हुआ। राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए क्योंकि उन्होंने जीवन भर धर्म, सत्य, और मर्यादा का अनुचालन किया।

रामायण के अनुसार, राम जी का जन्म दोपहर के माध्यान काल में हुआ था। इसलिए पूजा का मुख्य मुहूर्त भी दोपहर का होता है। यह पर्व चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन आता है। भक्त उपवास रखते है, रामायण पढ़ते है, भजन गाते है और रामलला की मूर्ति की पूजा करते है। उत्तर भारत में राम नवमी का उत्सव खासतौर पर अयोध्या में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

2026 में राम नवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 2026 में राम नवमी तिथि का समय यह है:
. नवमी तिथि शुरू: 26 मैच 2026 , सुबह 11:48 बजे
.नवमी तिथि समापन: 27 मार्च 2026, सुबह 10:06 बजे तक
मध्यान्ह मुहूर्त (राम जन्म का मुख्य समय)

26 मार्च को दोपहर 11:13 बजे से 1:41 बजे तक लोग दोपहर से राम जन्मोत्सव मनाने लगेंगे। 27 मार्च को भी दोपहर का मुहूर्त उपलब्ध है, लेकिन राम जन्म मुख्य रूप से 26 तारीख के मध्यान्ह में माना जाता है। इस साल तिथि दो दिनों में फैली हुई है, इसलिए कई जगहों पर दोनों दिन पूजा अर्चना का शुभ योग बना रहा है।

इस बार दो दिन क्यों मनाए जाएंगी रामनवमी? पूरा कारण

सबसे बड़ा सवाल यही है। कारण सरल है— नवमी तिथि दो ग्रेगोरियम दिनों में फैल गई है। 26 मार्च दोपहर 11:48 बजे शुरू होती है। राम जी का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए 26 तारीख को मुख्य जन्मदिन मनाया जा रहा है।

. तिथि 27 मार्च सुबह 10:06 मिनट तक चलेगी। सुबह सूर्योदय के समय रामनवमी तिथि मौजूद रहेगी।

हिंदू पंचांग जैसे विश्वनीय में पंचांग में भी लिखा है। रामनवमी 26 मार्च को और वैष्णव रामनवमी 27 मार्च को है। अयोध्या में उदय तिथि को महत्व देते हुए 27 मार्च को मुख्य उत्सव हो सकता है, जबकि राम मंदिर में सूर्य तिलक 26 मार्च को दोपहर में हो रहा है इसी कारण भक्ति दोनों दिन राम भगवान की पूजा कर रहे हैं, और यह उत्सव मना रहे हैं।

सही तिथि कौन सी है 26 या 27 मार्च?

आईए जानते हैं कि सही तिथि, तारीख कौन सी मानी जाएगी रामनवमी के लिए ज्यादातर भक्ति और घरेलू पूजा 26 मार्च मुहूर्त के कारण दोपहर से शुरू हो जाएगी लेकिन अयोध्या में और वैष्णव परंपरा के अनुसार 27 मार्च को ही सूर्योदय उदय तिथि के अनुसार मनाई जाएगी।

दोनों दिन पूजा कर सकते हैं क्योंकि दोनों दिन शुभ है 26 मार्च वाले दिन माता दुर्गा अष्टमी पूजा भी है और रामनवमी का दिन का संचालन भी बल्कि श्रद्धा और भक्ति के अनुसार दोनों दिन राम नाम जय, आरती और दान कर सकते हैं।

राम नवमी का धार्मिक महत्व और कथा

रामनवमी पर भगवान राम ने धर्म का नाश और धर्म की स्थापना की याद दिलाई जाती है। क्योंकि राम जी ने वनवास में भी मर्यादा नहीं छोड़ी, इसी दिन व्रत रखने से मन शुद्ध होता है और परिवार में सुख शांति आती है। कथा के अनुसार राजा दशरथ को पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ किया। यज्ञ से मिले प्रसाद को खाकर चार रानियां ने पुत्र प्राप्त किए। कौशल्या ने राम को जन्म दिया, रानी कैकई ने भरत को जन्म दिया, रानी सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। जन्म के समय पुनर्वसु नक्षत्र और मध्यान्ह मुहूर्त था। भक्ति आज भी राम सीता लक्ष्मण हनुमान की पूजा करते हैं।

घर पर रामनवमी कैसे मनाए ? पूजा विधि और व्रत नियम:

सुबह स्नान कर राम लला की मूर्ति या फोटो सजाएं। फल, फूल, मिठाई चढ़ाएं। दोपहर के 12:00 के आसपास आरती, राम नाम जप, रामायण पाठ करें। फलाहार या एक सामान्य फल दूध में शाम को परण मतलब उपवास रखकर शाम को मुहूर्त के अनुसार उपवास तोड़े। गरीबों को अन्न, कपड़े या राम नाम की पुस्तक दें। रात्रि में सभी लोग एकत्रित होकर भजन कीर्तन करे और रघुपति राघव राजाराम का गान करे। और 27 मार्च को भी हनुमान चालीसा पढ़कर भक्ति के राज्ञमय में घुल जाए।

राम नवमी 2026 पर शुभ योग और सावधानियां

इस साल पुनर्वसु नक्षत्र और शोभन योग बना रहा है— बहुत शुभ। लेकिन दोपहर के बाद तिथि कमजोर होती है, इसलिए मुख्य पूजा 26 को करें। उपवास के समय नमक न ले, और क्रोध न करे।

लोगो के आम सवाल (FAQ)

. क्या दोनों दिन व्रत रखे?
एक दिन रखे, लेकिन दोनों दिन पूजा कर सकते है।

. अयोध्या में कब जाना अच्छा रहेगा?
दोनों दिन जाना अच्छा होगा क्योंकि वो तो भक्ति का धाम है, पहले दिन सूर्यतिलक दूसरे दिन जन्मोत्सव।

. क्या महिलाएं व्रत रखती है?
हां, लेकिन स्वास्थ्य देखकर उपवास रखे।

. राम नाम जपने से क्या मिलता है?
राम नाम जपने से पाप नष्ट होते है, और सुख शांति मिलती है।

निष्कर्ष: भक्ति ही असली रामनवमी

2026 की राम नवमी हमें याद दिलाती है कि तिथि का कन्फ्यूजन हो सकता है, लेकिन राम की भक्ति कभी नहीं रुकती। 26 या 27 मार्च जो भी दिन हो , राम नाम जप करे, मर्यादा का पालन करे , राम जी की कृपा से घर परिवार सुखी रहे, देश में शांति बनी रहे।

  • जय श्री राम! जय सियाराम!

Writer — Dipanshu

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