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West Bengal Schools में अब रोज गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, सुवेंदु अधिकारी ने जारी किया नया आदेश

West Bengal Schools में अब रोज गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, सुवेंदु अधिकारी ने जारी किया नया आदेश

West Bengal Schools में शिक्षा और राष्ट्रभक्ति को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। अब छात्र-छात्राएं रोजाना स्कूल शुरू होने से पहले राष्ट्रीय गीत गाएंगे।

कब से लागु होगा यह नियम

राज्य शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि यह नियम 8 मई से लागू किया जाएगा। इसके तहत सभी स्कूलों को सुनिश्चित करना होगा कि सुबह की सभा में विद्यार्थी नियमित रूप से ‘वंदे मातरम्’ के गायन में भाग लें।

अब West Bengal Schools में भी अनुशासन होगा तेज

राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और अनुशासन की भावना को मजबूत करना है। अब तक अधिकतर स्कूलों में केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया जाता था, लेकिन अब ‘वंदे मातरम्’ को भी प्रार्थना गीत के रूप में शामिल किया जाएगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम छात्रों को भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने की दिशा में उठाया गया है।

स्कूलों को दिए गए सख्त आदेश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि सुबह की प्रार्थना सभा में हर छात्र-छात्रा की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

कुछ स्कूलों को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि नियम के पालन को रिकॉर्ड करने के लिए कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए। राज्य सरकार ने साफ किया है कि आदेश का पालन सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में अनिवार्य होगा।


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क्या है ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास?

क्या है ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास?

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वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसकी रचना प्रसिद्ध साहित्यकार Bankim Chandra Chattopadhyay ने की थी। यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।

1905 में बंगाल विभाजन आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख नारा बन गया था। लोग प्रभात फेरियों में यह गीत गाते थे और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकता का संदेश देते थे।

महान कवि Rabindranath Tagore भी इस आंदोलन से जुड़े थे। बाद में 1906 में बिपिन चंद्र पाल और अरविंदो के संपादन में ‘बंदे मातरम्’ नामक अखबार शुरू हुआ, जिसने देश में आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया।

भारत की संविधान सभा ने 1950 में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

राज्य सरकार के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे देशभक्ति और भारतीय संस्कृति से जोड़ने वाला सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक नजरिए से भी देख रहे हैं।

फिलहाल पश्चिम बंगाल के स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने का फैसला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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