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“विश्व शौचालय दिवस (World Toilet Day) 2025: बदलती दुनिया में स्वच्छता”

विश्व शौचालय दिवस को अंतर्राष्ट्रीय शौचालय दिवस या अंग्रेजी में इसे World Toilet Day भी कहते है। विश्व शौचालय दिवस को हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है, इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस भी मनाया जाता है। विश्व शौचालय को राष्ट्रीय शौचालय भी कहा जाता है।

शौचालय आज की दौर में अति आवश्यक पूर्ण संसाधन बन चुका है, क्योंकि यह हर घर में होना चाहिए जिससे स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिलाओं के सम्मान और इज्जत का घर होता है। टॉयलेट को दुनियां में कई नामों से जाना जाता है जिनमें शौचालय, वाशरूम, लू और लैट्रिन नाम आदि शामिल है, परंतु हम आपको अनेकों नाम जहां –जहां प्रयोग होता है, उस अनुसार से आपको बताएंगे जैसे—

विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार नाम:

विश्व शौचालय दिवस

भारत: लू, लैट्रिन, पॉटी, इज्जत घर, शौचालय, वाशरूम, रेस्ट रूम और टटी घर आदि।
अमेरिका: बाथरूम, वाशरूम, जॉन, टायलेट आदि।
यूके और आयरलैंड: बाथरूम, डब्लूसी, टॉयलेट, लू आदि।
कनाडा: बाथरूम।
ऑस्ट्रेलिया: डनी।

शौचालय को और अधिक नामों से जाना जाता है जैसे —

लैवेट्री – एक औपचारिक और विनम्र शब्द है, जो अक्सर हवाई जहाज पर बोला जाता है

अन्य बोलचाल के शब्द , अपनी इच्छानुसार:

. कमोड
. सुविधाएं
. केबिन
. पर्सनल सिंहासन

आदि नामों से जाना जाता है, या खुद से रखा जाता है।

इतिहास:

अगर हम बात करें कि शौचालय का आविष्कार कब हुआ था तो इसको सबसे पहले 1556 में सर जॉन हैरिंग्ट ने किया था। हालांकि इसका व्यापक उपयोग 19वीं साड़ी के मध्य तक शुरू नहीं हुआ। इससे भी पहले, सिंधु घाटी सभ्यताबी( लगभग 3300– 1900 ईसा पूर्व) के समय लॉथल, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसी जगहों पर फ्लश करने वाले शौचालयों के प्रमाण मिले है। इसके साक्ष्य से हमे पता चलता है, कि शौचालय का इतिहास बहुत पुराना है और साथ ही इससे जुड़ा स्वच्छता है।

सिंधु घाटी सभ्यता से पता चलता है, कि पहले घरों में अच्छी व्यवस्था के साथ गांव की पक्की नालियां और साफ़ सुथरा सड़क और हरा भरा गांव आदि के साक्ष्य मिले है। जिससे हमें पता चलता कि पहले के लोग भी शौचालय नाम के शब्द से परिचित थे।

1596 में आधुनिक फ्लश शौचालय का आविष्कार सर जॉन हैरिंग्टन ने महारानी एलिजाबेथ प्रथम के लिए एक फ्लश शौचालय का नक्शा बनाया था। लेकिन महारानी ने शौचालय का उपयोग नहीं किया था।

विश्व विश्व शौचालय दिवस पहली बार 2001 में विश्व शौचालय संगठन द्वारा मनाया गया था और इसे 2013 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया था परंतु जब से मनाया गया वह तारीख 19 नवंबर की थी इसलिए हर साल 19 नवंबर को ही विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है।

इसकी आधिकारिक घोषणा 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 19 नवंबर को पूरे विश्व में मनाने का आदेश जारी किया तब से या पूरे विश्व में 19 नवंबर को मनाया जाने लगा। लेकिन अगर बात करें हम की सबसे पहले किसने टॉयलेट डे की शुरुआत की थी, तो वर्ल्ड टॉयलेट डे “जैक सिम” ने मनाया था जब उन्होंने सिंगापुर में विश्व शौचालय संगठन की स्थापना की थी।

विश्व शौचालय दिवस क्यों मनाया जाता है?

विश्व शौचालय दिवस, को सभी लोगों को शौचालय के प्रति जागरूक करना और सभी लोगों में शौचालय बनाने के लिए उत्साहित करना, और स्वच्छता के प्रति उत्साहित करना आदि शामिल है। विश्व शौचालय का उद्देश्य दुनिया भर में साफ सफ़ाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना है यह दिन सुरक्षित और स्थाई स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करता है और सभी के लिए स्वच्छ और सुलभ शौचालयों की वकालत करता है। आज भी दुनिया में करोड़ों लोग बिना शौचालय के रहते है जो इसके लाभ का फायदा नहीं उठाते और इसी कारण स्वच्छता भी भंगित हो जाती है। इसलिए स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

. स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा:

सुरक्षित शौचालय और स्वच्छता न केवल बीमारियों को रोकते है, बल्कि जीवन भी बचाते है खुले में शौच से होने वाली डायरिया, टाइफाइड, हैजा, मलेरिया, डेंगू जैसी अनेक बीमारियां से बचाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि गंदगी से मच्छर और अनेक कीड़े उत्पन्न होते है जिससे तमाम बीमारियां उत्पन्न होती है।

स्वच्छता की कमी के प्रति जागरूकता:

दुनिया भर में अरबों लोग अभी भी सुरक्षित रूप से प्रबंधित स्वच्छता के बिना रहते है, और यह दिन उनकी स्थिति पर ध्यान आकर्षित करता है, क्योंकि अभी किसी घर में शौचालय नहीं बना, जहां तक सार्वजनिक शौचालय भी सरकार द्वारा नहीं बनाया गया इस कारण ज्यादातर लोग बिना शौचालय के रहते है।

सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को पूरा करना:

यह दिन 2030 तक सभी के लिए जल और स्वच्छता के लक्ष्य (SDG 6) को प्राप्त करने के लिए वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा देता है। Sustainable development Goals सतत विकास लक्ष्य का मुख्य कार्य गरीबी और असमानता को खत्म करना, पृथ्वी की रक्षा करना और सभी लोगों के लिए शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना है। यह 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले 17 परस्पर जुड़े वैश्विक लक्ष्यों का एक समूह है, जिसमें भुखमरी, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता जैसे सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों को शामिल किया गया है।

. शांति और गरिमा सुनिश्चित करना:

विश्व शौचालय दिवस यह भी दर्शाता है कि संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं के समय में लोगों को सुरक्षित स्वच्छता की आवश्यकता होती है, जो शांति और गरिमा को बढ़ावा देता है और साथ इस तरह के विचार धाराओं से समाज में शांति और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ावा देता है।

भारत सरकार द्वारा शौचालय के लिए चलाएं गए अभियान, और योजना:

भारत सरकार ने शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए “स्वच्छ भारत मिशन” अभियान चलाया है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को शौचालय बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस मिशन का उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त बनाना है|

और इसके तहत लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है और वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसमें शौचालय के लिए 12000 तक की मदद शामिल है। इसके अलावा, कुछ राज्य सरकारें भी इस अभियान के तहत अनेक और लाभकारी योजनाओं, जैसे कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए शौचालय सहायता योजना जैसी पहल चला रही है।

स्वच्छ भारत मिशन (SBM ) के उद्देश्य और सम्बन्धित जानकारी:

उद्देश्य— ग्रामीण और शहरी दोनो क्षेत्रों को खुले में शौच न करने की व्यवस्था बनाना और सभी नागरिकों के लिए स्वच्छता सुनिश्चित करना आदि शामिल है।लोग अक्सर खुले में शौच करना ज्यादा पसंद करते है, उसमें शमिल लोगों में पुरुष इस हद तक रहते है, किसी को मजबूरी हो जाती है खुले में शौच करने की जैसे जगह की कमी, और धन का अभाव अनेकों समस्याएं होती है|

परंतु महिलाओं के लिए इज्जत घर का होना बहुत जरूरी है, सरकार इसके लिए गरीब महिलाओं को पैसा भी देती है, लेकिन कुछ पैसा तो गौण का ग्राम भोजक यानि प्रधान खा जाता है, इससे गरीब घर के लोग शौचालय नहीं बनवा पाते।

वित्तीय सहायता — प्रतिखारी शौचालय निर्माण के लिए सरकार द्वारा 12000 की राशि दी जाती है जिसमें केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार का योगदान रहता है परंतु गरीब लोगों से ज्यादा इस राशि का फायदा अमीर लोग उठा लेते हैं क्योंकि यह अभियान गरीब लोगों तक पहुंच ही नहीं पाती और पहुंचती है तो इसमें से कुछ अंश सरकारी दलाल और प्रधान को देना पड़ता है।

अन्य पहले:

कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना।
स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाना।
सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण करना।
ट्रांसजेंडरों के लिए अलग शौचालय बनवाना।

गंदगी किस कारण फैलती है?

गंदगी ज्यादा लोगों के इकट्ठा हो जाने पर तथा उनके ही द्वारा कचरा फैलाने पर फैलती है जैसे उत्तराखंड में ज्यादा श्रद्धालुओं के बढ़ने से लगभग चार करोड़ टन कचरा इकट्ठा हुआ या खबर 19 नवंबर 2025 की है आज के ही दिन की इससे पर्यावरण प्रदूषण होता है जिससे लोग बीमार पड़ते हैं सरकार इस बात का ध्यान नहीं देती कचरा संबंधित पर्यावरण संबंधित स्वच्छता संबंधित शिक्षा संबंधित स्वास्थ्य संबंधित अन्य मुद्दों पर सरकारी बात करते हैं|

जिससे लोगों में हानि देश का विकास रुक जाता है कृपया करके आप सबसे निवेदन है कि यह सब हमें भी ध्यान में रखना चाहिए कचरा को पूरे दान में ही डालना चाहिए और प्लास्टिक प्रदूषण जैसे अभियान चलाने चाहिए जिससे लोगों में जागरूकता आए और कचरा का सही जगह पर फेंका जाएं। स्वच्छता से जुड़े अनेक नारे हैं जिनका वर्णन हम यहां करते हैं जैसे–

. स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत।
. स्वच्छता अपनाओ समाज में खुशियां लो
. एक कदम स्वच्छता की ओर
. साफ सफाई रखें, भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बनाएं।
. स्वच्छ हाथ, उज्जवलभविष्य
. स्वच्छ रहें और स्वस्थ रहें
. स्वच्छता है महा अभियान, स्वच्छता में दीजिए अपना योगदान।
. स्वच्छता ही है जीवन का आधार, सबका करें देखभाल।
. स्वच्छ शहर, हरा भरा शहर।

शौचालय के नियम:

. शौचालय में गंदगी न फैलाएं
. शौच करने के बाद पानी जरूर डाल दे
. शौचालय के सभी नियमों का पालन करे
. पुरुष वाले पुरुष शौचालय का इस्तेमाल करे
. महिला, महिला शौचालय का ही इस्तेमाल करे
. शौच करने के बाद हाथ की साबुन से कम से 30 सेकेंड धोए।
. यदि शौच कर लेने के बाद बाहरी लोगों की शौच करने का अवसर दे ।

पूरी दुनिया और भारत में कितने शौचालय है?

बहुत लोगों का पूछना होता है, कि दुनिया में कितने शौचालय बने होंगे परंतु इस प्रश्न का बताना मुश्किल है, लेकिन UNICEF का कहना है कि दुनिया में लगभग 90 करोड़ लोग खुले में शौच करते है। और दुनिया की लगभग 60% आबादी के पास घरों में शौचालय नहीं है।

अगर बात भारत की आती है, तो भारत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगभग 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए है। इन शौचालयों का निर्माण कराने का अर्थ था कि लोग खुले में शौच करना बंद करदे, और माताओं और बहनों को खुले में शौच करने का अर्थ है, घर की मर्यादा अनुशासन भंग करना, इसलिए सभी के घर शौचालय का प्रबन्ध होना चाहिए इसे इसलिए ही तो इज्जतघर कहते है।

टॉयलेट एक प्रेम कथा से क्या सीख मिलती है?

टॉयलेट एक प्रेम कथा एक सच्ची कहानी है, यह कहानी मध्य प्रदेश की अनीता नरें की सच्ची कहानी पर आधारित है, उनका विवाह शिवराम से हुआ था, टॉयलेट के ससुराल जाना बंद कर दिया, लेकिन बात आती है, टॉयलेट एक प्रेम कथा की कहानी और पिक्चर की इस पिक्चर का निर्माता प्रेरण अरोड़ा और नीरज पांडेय है, और इसके मुख्य किरदार निभाने वाले अक्षय कुमार, और भूमि पेड़नकर, जोकि केशव,और उनकी पत्नी जया का रोल निभाया है, इस मूवी में और पात्र है, जो इससे जुड़े हर व्यक्ति का किरदार निभाया है|

यह मूवी 11 अगस्त 2017 में रिलीज हुई थी, और इसका बॉक्स आफिस कलेक्शन लगभग 300 करोड़ से ज्यादा हुई थी। यह मूवी टॉप हुई थी। यह मूवी हमे कुछ सीख देकर जाती है, जिसका वर्णन हम यहां करते है, टॉयलेट एक प्रेम कथा फिल्म कई सबक हमें सिखाती है बताती है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है| इसमें लौटा कंपनी के ऊपर आवाज उठाती है, जया जिसे आपने देखा होगा गांव की औरतें लोटा लेकर खुले में शौच करने जाती है।

स्वच्छता का महत्व महिलाओं का सम्मान जोक या कहानी ग्रामीण इलाकों के महिलाओं के लिए है और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा उत्साहित और जोश देती है यह कहानी पुरानी परंपराओं के खिलाफ जाते हैं जैसे घर में संडास का होना धर्म के विरुद्ध है अधर्म है तो इन सभी मतभेदों को दूर करती है। इस कहानी से हमें सही सोच और आधुनिकता को पुरानी और अन्य परंपराओं से आगे रखना बढ़ाने का आदेश देती है जो कि यह ग्रामीण इलाकों के महिलाओं और समाज के लिए जरूरी है।

स्वच्छता और सामाजिक सुधार बदलती है, दुनियां:

महिलाओं के लिए शौचालय का महत्व: यह मूवी हमें दिखाती है कि घर में शौचालय होना महिलाओं के लिए कितना जरूरी है या उनके स्वास्थ्य सुरक्षा सम्मान प्रदान करता है। जैसे एक मूवी अक्षय कुमार ने पैडमैन बनाया है उसमें भी महिलाओं के लिए पद कितना जरूरी है वैसे घर में शौचालय होना कितना जरूरी है यह मूवी हमें दर्शाती है।

जागरूकता फैलाना, अभियान चलाना:

यह फिल्म स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देती है एक तरह से या फिल्म हमारे लिए अभियान का माध्यम है और खुले में सोच जैसी गंभीर समस्या की लोगों का ध्यान आकर्षित करती है जिससे गंदगी बीमारी इत्यादि तरह के शरीर को घटक पहुंचने वाले बीमारियों से शौचालय बचाती है या हमारे लिए जरूरी है।

सोच में बदलाव की आवश्यकता:

फिल्म बताती है कि सिर्फ शौचालय बनाना ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए लोगों के मानसिकता में बदलाव लाना भी जरूरी है और शौचालय का उपयोग करना भी जरूरी है सरकार के पैसे का सही जगह के काम में लगाना जिस काम के लिए पैसा देता है यह जरूरी है और पुरानी परंपराओं जैसे चुनौतियों को जीतना स्वच्छता का ध्यान रखना आदि चुनौतियों से लड़ना हमारा धर्म है।

व्यक्तिगत और सामाजिक मुद्दे:

स्वच्छता जैसी समस्याओं के लिए लड़ना: फिल्म कामों के पात्र दिखता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने परिवार और समाज में गलत सोच के खिलाफ खड़ा होकर बदलाव ला सकता है, वह हर चुनौतियों से लड़ सकता है। वह किसी भी हद तक का जा सकता है।

प्रेम और सम्मान: यह कहानी दिखाई की एक सच्चा प्रेम केवल भावनाओं पर नहीं बल्कि एक दूसरे के समान और जरूरत को समझाने पर भी आधारित है और एक ऐसी समस्या का हल करना दूसरों को भी टॉयलेट के लिए प्रेरित करना पारंपरिक मान्यताओं से लड़ना कितना जरूरी है इस फिल्म में दिखाया गया है।

टॉयलेट मैन:

टॉयलेट मैन एक ऐसा नाम है जिन्होंने परंपराओं और मान्यताओं से लड़ा या कोई नहीं भारत के बिंदेश्वर पाठक है जिन्हें टॉयलेट मैन कहा जाता है यह “सुलभ इंटरनेशनल” के संस्थापक हैं उन्होंने भारत में स्वच्छता क्रांति लाने , सार्वजनिक शौचालय बनाने, और मैन्युअल स्कैवेंजिंग हाथ से मल उठाने को खत्म करने के लिए काम किया।

बिंदेश्वर पाठक का योगदान काफी पर्यावरण हितैषी है उन्होंने पर्यावरण अनुकूल शौचालय समाधान विकसित किया , और उन्होंने मैन्युअल स्कीवेजिंग के खिलाफ एक अभियान चलाया और सार्वजनिक शौचालय बनाने का अभियान चलाया तथा हर घर शौचालय अभियान चलाया गया।

IHHL ( Individual Household Latrine) व्यक्तिगत घरेलू शौचालय:

IHHL ग्रामीण का मतलब है “व्यक्तिगत घरेलू शौचालय” जो कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने की एक योजना है इस पहल का उपदेश खुले में सोच को खत्म करना और ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है यह योजना सच भारत मिशन के अंतर्गत चलाया गया है इस मिशन का मुख्य उद्देश्य है खुले में शौच को समाप्त करना और महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य, स्वच्छता, इज्जत का ध्यान रखना आदि है।

घरेलू शौचालय बनाने में कौन सा राज्य है और क्यों?

घरेलू शौचालय बनाने में गुजरात एक समय में उभरता हुआ था क्योंकि वहां स्वच्छ भारत अभियान के तहत घरेलू शौचालय के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई हालांकि वर्तमान में लक्षद्वीप में सबसे ज्यादा शौचालय वाले घर हैं शौचालय निर्माण में राज्यों की प्रगति स्वच्छ भारत मिशन जैसे सरकारी योजनाओं पर निर्भर करती है और सरकार के ऊपर भी डिपेंड होता है तथा उनके काम करने वाले कर्मचारियों का अपने काम के प्रति ध्यान देना जरूरी होता है।

निष्कर्ष:

विश्व शौचालय दिवस हर साल मनाने वाला सिर्फ दिन नहीं बल्कि समाज में उन सभी लोगों इसके प्रति जागरूक करना, और जरूरत मंद लोगों को सरकार द्वारा शौचालय दिलाना हमारा धर्म है, क्योंकि इससे स्वच्छता नहीं भंग होगी और हरा भरा हमारा देश रहेगा।

सारांश:

इस लेख में अंतरराष्ट्रीय शौचालय दिवस के बारे में संपूर्ण जानकारी सरल शब्दों में किया गया है जो कि आपको समझने में आसानी हो और आप भी इस अभियान का हिस्सा बने।

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