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मलेरिया के लक्षण, कारण और बचाव के सरल उपाय | Malaria Full Information in Hindi

मलेरिया के लक्षण, कारण और बचाव के सरल उपाय

क्या आप मलेरिया के लक्षणों और इसके इलाज के बारे में जानना चाहते हैं? इस लेख में पढ़ें मलेरिया के 5 प्रकार, बचाव के वैज्ञानिक तरीके और क्यों यह बीमारी खतरनाक हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें।

मलेरिया के लक्षण, कारण और बचाव के सरल उपाय | Malaria Full Information in Hindi ये लेख आपको मलेरिया से बचने , और उसके घरेलु उपाय के बारे में जानकारी देगी|

मलेरिया (Malaria ) क्या है?

Malaria

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मलेरिया एक गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो प्लास्मोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी (Parasite) के कारण होती है। यह परजीवी संक्रमित मादा एनोफिलीज़ (Anopheles) मच्छर के काटने से मनुष्यों के शरीर में प्रवेश करता है। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में मानसून के दौरान इसका प्रकोप सबसे अधिक होता है।

मलेरिया कैसे फैलता है? (संक्रमण चक्र)

मलेरिया सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में (छूने या हवा से) नहीं फैलता। इसका एक निश्चित चक्र होता है:
जब एक मादा एनोफिलीज़ मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटती है, तो वह खून के साथ मलेरिया के परजीवी भी सोख लेती है।
वही मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी उसके रक्तप्रवाह में चले जाते हैं।
महत्वपूर्ण चरण: रक्त में पहुँचने के बाद, ये परजीवी सबसे पहले व्यक्ति के लिवर (Liver) में जाते हैं और अपनी संख्या बढ़ाते हैं। इसके बाद वे लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर हमला करते हैं।

मलेरिया के प्रकार (अब 5 मुख्य प्रकार)

“विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अब प्लास्मोडियम के 5 मुख्य प्रकार इंसानों में मलेरिया फैलाते हैं, जिसमें P. knowlesi भी शामिल है। “मलेरिया के लिए जिम्मेदार परजीवी के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (P. falciparum): यह सबसे घातक है और मस्तिष्क मलेरिया (Cerebral Malaria) का कारण बन सकता है।
प्लास्मोडियम विवैक्स (P. vivax): भारत में इसके मामले सबसे अधिक पाए जाते हैं।
प्लास्मोडियम मलेरी (P. malariae)
प्लास्मोडियम ओवेल (P. ovale)
प्लास्मोडियम नोलेसी (P. knowlesi): यह पांचवां प्रकार है जो दक्षिण-पूर्वी एशिया में तेजी से देखा जा रहा है।

मलेरिया के लक्षण

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मच्छर के काटने के 7 से 15 दिन बाद लक्षण उभरते हैं। मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
तेज बुखार के साथ कंपकंपी (ठंड) लगना।
बुखार उतरते समय अत्यधिक पसीना आना।
तेज सिरदर्द, जी मिचलाना और उल्टी।
मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द।
गंभीर मामलों में: खून की कमी (एनीमिया), पीलिया (Jaundice) और सांस लेने में तकलीफ।

मलेरिया से बचाव के ठोस उपाय

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मलेरिया से बचने का एकमात्र तरीका है मच्छरों के प्रजनन को रोकना और खुद को कटने से बचाना।

पानी का प्रबंधन: केवल गंदगी ही नहीं, बल्कि साफ पानी को भी जमा न होने दें (जैसे कूलर, गमले, पक्षियों के बर्तन), क्योंकि मलेरिया के मच्छर अक्सर ठहरे हुए साफ पानी में पनपते हैं।

मच्छरदानी: सोते समय कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी (ITNs) का प्रयोग सबसे सुरक्षित है।

सुरक्षित कपड़े: शाम के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें।

जैविक नियंत्रण: स्थायी जल निकायों में गंबूशिया मछली छोड़ें, जो मच्छरों के लार्वा को खा जाती है

उपयोगी सलाह: यदि आपको बुखार है, तो जांच रिपोर्ट आने तक केवल पैरासिटामोल लें। एस्पिरिन या ब्रूफेन जैसी दवाएं लेने से बचें, क्योंकि यदि यह डेंगू हुआ तो ये दवाएं रक्तस्राव (bleeding) का खतरा बढ़ा सकती हैं।

इलाज और सावधानियां

“मलेरिया का इलाज WHO द्वारा सुझाई गई ACT (Artemisinin-based Combination Therapy) के माध्यम से किया जाता है। डॉक्टर परजीवी के प्रकार के आधार पर ही दवा तय करते हैं। “मलेरिया का इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते सही समय पर जांच हो।

तुरंत जांच: बुखार होने पर तुरंत ‘ब्लड स्मीयर टेस्ट’ या ‘RDT’ करवाएं।

दवा का कोर्स: डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं (जैसे ACT थेरेपी) का पूरा कोर्स करें। लक्षण ठीक होने के बाद भी दवा बीच में न छोड़ें, अन्यथा परजीवी लिवर में जीवित रह सकते हैं और बीमारी दोबारा हो सकती है।

स्व-उपचार से बचें: मेडिकल स्टोर से बिना सलाह के कोई भी दवा (जैसे पुरानी क्लोरोक्वीन) न लें, क्योंकि अब कई क्षेत्रों में परजीवी इन दवाओं के प्रति ‘प्रतिरोधी’ (Resistant) हो चुके हैं।

निष्कर्ष

मलेरिया से डरने के बजाय सावधानी और सही जानकारी जरूरी है। अपने घर के आसपास जल-जमाव रोककर और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लेकर आप स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। और सही समय पर इस बीमारी के बारे में जानकारी अपने दोस्तों को भी दे सकते है, ताकि कोई भी इस बीमारी से ग्रसित न हो पाए।

  • ⚠️ हेल्थ डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी लक्षण की स्थिति में तुरंत प्रमाणित डॉक्टर से संपर्क करें।

मलेरिया से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या मलेरिया का मच्छर दिन में काटता है या रात में?
जवाब: मलेरिया फैलाने वाला मादा एनोफिलीज़ मच्छर मुख्य रूप से सूर्यास्त (शाम) से लेकर सूर्योदय (सुबह) के बीच यानी रात के समय सबसे अधिक सक्रिय होता है और काटता है।

Q2. क्या एक बार ठीक होने के बाद मलेरिया दोबारा हो सकता है?
जवाब: हाँ, मलेरिया दोबारा हो सकता है। इसके दो कारण हो सकते हैं: पहला, दोबारा संक्रमित मच्छर का काटना। दूसरा, P. vivax जैसे परजीवी लिवर में सुप्त अवस्था में रह जाते हैं और इलाज अधूरा छोड़ने पर महीनों बाद फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

Q3. मलेरिया बुखार की पहचान कैसे करें?
जवाब: मलेरिया के बुखार की मुख्य पहचान यह है कि इसमें रोगी को बहुत तेज ठंड (कंपकंपी) लगती है और फिर तेज बुखार आता है। बुखार उतरते समय मरीज पसीने से तर-बतर हो जाता है। यह चक्र हर 48 से 72 घंटे में दोहराया जा सकता है।

Q4. क्या मलेरिया के लिए कोई वैक्सीन (टीका) उपलब्ध है?
जवाब: हाँ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बच्चों के लिए RTS,S/AS01 (Mosquirix) और हाल ही में R21/Matrix-M वैक्सीन की सिफारिश की है। हालांकि, व्यापक स्तर पर बचाव के लिए अभी भी मच्छरदानी और साफ-सफाई को ही सबसे प्रभावी माना जाता है।

Q5. मलेरिया में प्लेटलेट्स कम क्यों होते हैं?
जवाब: मलेरिया का परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) को नष्ट करता है और शरीर में सूजन (inflammation) पैदा करता है। इस प्रक्रिया में स्प्लीन (Spleen) सक्रिय हो जाती है, जो संक्रमित कोशिकाओं के साथ-साथ प्लेटलेट्स को भी शरीर से हटाने लगती है, जिससे उनकी संख्या कम हो जाती है।

स्रोत (Sources): इस लेख में दी गई जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के दिशा-निर्देशों पर आधारित है। ताकि सभी लोगों तक यह जानकारी पहुंचे और उस घातक बीमारी से बचे।

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