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अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस (International Mountain Day) 2025: पर्वत, प्रकार और दुनिया के सबसे ऊँचे शिखर

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस

पर्वत धरती की सबसे अद्भुत और प्राचीन संरचनाओं में से एक है। यह सिर्फ ऊंचाई का प्रतीक नहीं बल्कि , संस्कृति, विज्ञान , मौसम, जीवन जीने का आधार और रोमांच क करने की जगह भी है। पर्वतों की गोद में बसे जंगल, नदियां, जानवर और इंसान एक अलग दुनिया बनाते हैं। इसलिए “पर्वत सिर्फ धरती पर खड़े विशाल पहरेदार नहीं होते, बल्कि प्रकृति की वो जीवित कहानियां है जिनका हर पत्थर और हर शिखर सदियों का इतिहास सुनाता है”।

आईए जानते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस (International Mountain Day) 2025: पर्वत, प्रकार और दुनिया के सबसे ऊँचे शिखर, और पर्वत क्या है?, पर्वत किसे कहते हैं?, और इससे जुड़ा लेख जो हर साल 11 दिसंबर को पूछा जाता है जिसे अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के नाम से जाना जाता है, उसके बारे में आज हम आपको इस लेख में इससे जुड़ी हुई संपूर्ण जानकारी देंगे जो आपको भविष्य में काम देगा।

पर्वत क्या है?(What is the Mountain)?

धरती की वह प्राकृतिक ऊंची संरचना है , जो आसपास की जमीन की तुलना में बहुत अधिक ऊंची होती है। यह चट्टानों, मिट्टी, खनिजों और भू स्तरों के ऊपर उठने से बनती है। पर्वत की ऊंचाई, ढलान और आकर इसे पहाड़ से भी बड़ा और विशाल बनाते हैं। इसकी चोटी, घटियां, और ढलान मिलकर एक भौगौलिक क्षेत्र बनाते है जिसे पर्वत कहते है।
पर्वत वहां ऊंचा भूभाग है जो धरती के उत्थान से बनता है और चारों ओर की सतह से काफी ऊपर होता है यही इसकी विशेषता है जिसे पर्वत के नाम से जाना जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस हर वर्ष 11 दिसंबर को इसलिए मनाया जाता है ताकि दुनिया पर्वतों के महत्व, उनसे मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों का लाभ और पर्वतीय समुदायों की चुनौतियां की सामना कर सके। पर्वत मानव जीवन के लिए पानी, जैव विविधता, स्वच्छ हवा, और औषधियां, कृषि का प्रमुख केंद्र है। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित पर्यटन, वनों की कटाई और पर्यावरण प्रदूषण के कारण पर्वत तेजी से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं जो हमारे लिए घातक है।

इतिहास (History):

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का इतिहास पृथ्वी के पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा, अनुसंधान और उनके महत्व को समझने के वैश्विक पहल से जुड़ा है। इसकी बुनियाद साल 1992 में रखी गई, जब ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित “वैश्विक शिखर सम्मेलन” के दौरान एजेंडा 21 में पर्वतीय पारिस्थितिकी (Maunatin Ecosystem) को एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में शामिल किया गया। यह पहली बार था जब विश्व स्तर पर या माना गया की पर्वत न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि जल, जैव विविधता , मौसम और मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है जिससे जीवन जीने का आधार छुपा हुआ है।

इसके बाद पर्वतीय संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nation) ने वर्ष 2002 को ” अंतर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष ” घोषित किया। इस साल ने दुनिया का ध्यान पर्वतों और वहां रहने वाले समुदायों की समस्याओं की और आकर्षित किया। इसकी सफलता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2003 से हर वर्ष 11 दिसंबर को “अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस” के रूप में मनाने का संकल्प लिया।

उद्देश्य—

इस दिवस का उद्देश्य पर्वतों की सुरक्षा, पर्वतीय संसाधनों का सतत उपयोग, ग्लेशियरों के बचाव, पर्वतीय किसानों व जनजातियों के जीवन यापन में सुधार, पर्वतीय जैव विविधता को बचाना, समाज में पर्वत के प्रति जागरूकता लाना तथा वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभाव पर जागरूकता फैलाना। आज या दिवस दुनिया भर में पर्वतों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बन चुका है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस को कैसे मनाएं?

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस को मनाने का सबसे सरल तरीका, आप इस दिन पर्वत की सुरक्षा के लिए संकल्प करें, वृक्षारोपण बढ़ाएं, अपने गांव , समाज तथा स्कूल के मंच पर अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस के बचाव, और इसकी सुंदरता पर भाषण दें। ताकि आपके साथ मिलकर सभी लोग पर्वत की सुरक्षा कर सके।

और पर्यावरण को प्रदूषित न करे जिससे पर्वत को हानि पहुंचता है, इस तरह के टॉपिको पर एक दूसरे से बात करे। आज के दिन समाज में पर्वत सुरक्षा के प्रति जागरूकता लाना, इसके महत्व को सबको बताना, तथा इसके प्रति सकारात्मक प्रभाव लाना है। ताकि यह दिन अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस के रूप में मनाया जा सके।

Note: अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 की थीम “कृषि , जल, सुरक्षा और कमजोर पर्वतीय समुदायों की आजीविका के लिए ग्लेशियर सुरक्षा के महत्व को उजागर करने का एक खास मौका है।” ग्लेशियर का अर्थ है, जो पृथ्वी पर पाए जाने वाले बर्फ और हिम के विशाल भंडार है, जमे हुए बहुद्देशीय से कही अधिक है। वे पारिस्थितिकी तंत्रों और समुदायों के लिए जीवन रेखा है।

पर्वत से जुड़ी हुई कुछ महत्व पूर्ण बातें जो एग्जाम और इंटरव्यू में पूछे जाते है?

: पर्वत कैसे बनते है?
पर्वत मुख्य रूप से तीन माध्यमों से बनते हैं—

. टेक्टोनिक प्लेटों का टकराना ( जैसे –हिमालय)
. ज्वालामुखीय क्रिया (जैसे –फूजी पर्वत, माउंट किलिमंजारो)
. अपछय व शरण के अवशेष ( जैसे – अरावली दुनियां की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक)



: पर्वत के प्रकार
1. मुड़े हुवे पर्वत ( Fold Mountains)

. हिमालय, आल्प्स

2. अवरोध पर्वत (Block Mountains)
. विंध्याचल, सिएरा नेवादा

3. ज्वालामुखीय पर्वत ( Volcanic Mountains)
. फूजी यामा

4. अपछाई पर्वत (Residual Mauntains)
. अरावली, राजमा हल्स

: दुनियां और भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं

. दुनिया में सबसे ऊंची श्रृंखला— हिमालय
. दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत— माउंट एवरेस्ट
. भारत का सबसे ऊंचा पर्वत— कंचनजंगा
. भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं— हिमालय, अरावली , विंध्य, सतपुड़ा, पूर्वी व पश्चिमी घाट।

: पर्वतों का महत्व

. लगभग 80% ताजा पानी पर्वतों से मिलता है।
. पर्वत जैव विविधता के सबसे बड़े केंद्र हैं।
. नदियों की उत्पत्ति का मुख्य स्रोत है।
. मौसम और जलवायु नियंत्रण करते हैं।
. पर्यटन रोमांच और औषधीय पौधों का बड़ा केंद्र है।
. कई संस्कृतियों और धर्मों में पर्वत पवित्र माने जाते हैं और इनका वर्णन वेदों में है।

: दुनिया के तीन प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखलाएं

1. Himalaya ( हिमालय)
2. Aalps ( आल्प्स)
3. एंडीज ( दुनिया की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला)

पर्वतों पर जलवायु क्यों अलग होती है?
ऊंचाई बढ़ाने पर तापमान घटता है और हवा पतली हो जाती है, इसलिए पर्वतीय जलवायु मैदानों से अलग होती है इस कारण पर्वत पर जलवायु अलग हो जाती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवससारांश (Summary):

पर्वत, धरती की प्राकृतिक, विशाल और प्राचीन संरचनाओं हैं जो आसपास के जमीनों से काफी ऊंची होती हैं। यह न केवल भौगोलिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि संस्कृति, विज्ञान , और जीवन जीने का आधार भी है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाने की शुरुआत 1992 में रियो डी जनेरियो के “वैश्विक शिखर सम्मेलन” से हुई, जहां एजेंडा 21 में पारिस्थितिकी को शामिल किया गया इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2002 को “अंतर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष ” घोषित किया और फिर 2003 से हर साल 11 दिसंबर को यह दिवस मनाने का फैसला लिया गया।

इस दिवस का उद्देश्य पर्वतों की सुरक्षा, उनके संसाधनों का सतत उपयोग, ग्लेशियरों का बचाव, पर्वत संरक्षण के विषय को समाज में जागरूकता फैलाना आदि है।
लेख में पर्वत से जुड़े हुए सवालों का वर्णन है जो परीक्षा, इंटरव्यू आदि जगहों में पूछा जाता है जैसे — दुनिया का सबसे बड़ा एवरेस्ट, “माउंट एवरेस्ट” जैसे प्रश्नों पर ध्यान दिया गया है।

निष्कर्ष (Conclusion):

पर्वत सिर्फ “धरती पर खड़े विशाल पहरेदार” नहीं है, बल्कि वे प्राकृतिक की वो जीवित कहानियां है, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित पर्यटन, और प्रदूषण के कारण इन अमूल्य संरचनाओं को खतरा है। अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम वृक्षारोपण और जागरूकता के माध्यम से पर्वतों की सुरक्षा करें उनके महत्व को समझें और भावी पीढ़ियों के लिए इन प्राकृतिक विरासतों का संरक्षण सुनिश्चित करें।

अक्सर लोगों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न?

Ques 1: पर्वतारोहण दिवस किसे कहते हैं?
पर्वतारोहण दिवस को अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस कहते हैं जोकि इसका दूसरा नाम है।

Ques 2: माउंट एवरेस्ट पर सबसे पहले कौन चढ़ा था?
माउंट एवरेस्ट पर सबसे पहले न्यूजीलैंड के “एडमंड हिलेरी” और नेपाल के शेरपा “तेनजिंग नोर्गे” ने 29 मई 1953 को पहुंचे थे।

Ques 3: भारत से कौन-कौन माउंट एवरेस्ट पर चढ़े?
सबसे पहले भारतीय “अवतार सिंह चीमा” 1965 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़े थे और भारतीय महिला में ” बछेंद्री पाल” 1984 को माउंट एवरेस्ट पर पहुंची।

Note: एक साल में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला भारतीय पर्वतारोही “अंशु जमशेनपा” है जिन्होंने मई 2017 में केवल 5 दिनों के अंदर यह रिकॉर्ड बनाया था।

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